लता मंगेशकर की जीवन कहानी- Life story of Lata mangeshkar in Hindi

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लता मंगेशकर इंदौर रियासत में पैदा हुई थी, जो मध्य प्रदेश मैं है. उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर एक शास्त्रीय गायक और थिएटर कलाकार थे. लता उनके सभी भाई बहनों मैं सबसे बड़ी थी. अपने करियर की शुरुवत संगीत नाटकों में पांच साल की उम्र अपने पिताजी के साथ की थी ,वह केवल 13 की थी जब उनके पिताजी का का निधन हो गया. और फिर असली दुनिया में उनका संघर्ष शुरू हुआ, 1940 की शुरुआत के दौरान, वह उसे भी गुलाम अली खान बड़े हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में बुनियादी प्रशिक्षण दिया, जो उस्ताद अमानत अली खान जैसे प्रख्यात संगीत हस्तियों द्वारा था ग़ुलाम हैदर साहब ने न केवल उनका साथ दिया बलके उन्हे ‘दिल मेरा टोडा’ फिल्म “मजबूर” (1948) में ब्रेक भी दिया. 1950 के दशक में लता मंगेशकर के लिए एक बहुत ही आकर्षक दौर था. वह एसडी बर्मन, खय्याम, शंकर जयकिशन, नौशाद, हेमंत कुमार और आनंदजी-कल्याणजी की तरह उस समय की सबसे प्रमुख संगीत निर्देशकों के साथ काम कर रही थी और उनकी फ़िल्मे कमियाब बी रही थी. “बैजू बावरा” (1952), “मुगल ए आजम” (1960), “श्री420″ (1955), “चोरी चोरी” (1956), “देवदास” (1955), “मधुमती” (के लिए गाया 1958). उसे गाना “आजा रे परदेसी” उस वर्ष एक बड़ी हिट फ़िल्मे थी इसने उनके करियर को चाँद चार लगा दिए. 1950 के दशक में लता मंगेशकर ने खुद को स्थापित किया और काफ़ी नाम भी कमाया. भारत रत्न (2001), दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म भूषण, पद्म विभूषण, महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार, 1972 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, 1974 और 1990, 1959 में फिल्म फेयर पुरस्कार, भी दिए गये. लता मंगेशकर को 1999 में राज्यसभा के सदस्य बने और 2001 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था. वह अपने स्वर्गीय पिता के नाम में पुणे में एक अस्पताल स्थापित किया गया है.

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