अमेरिका में कर्मचारियों के ट्रांसफर नहीं होते – Transfer of employees is not Happen In US in Hindi

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अमेरिका (यूएसए) में आमतौर पर सरकारी-गैरसरकारी दोनों ही तरह की नौकरियों में कर्मचारियों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर तबादले या ट्रांसफर नहीं होते।

नौकरी यदि प्राइवेट कंपनी की है और यदि उसके अमेरिका के कई शहरों में दफ्तर हैं तो आवेदक से भर्ती के समय ही पूछ लिया जाता है कि वह किस शहर या स्थान पर काम करना पसंद करेगा और उसी शहर या स्थान पर उसकी नियुक्ति कर दी जाती है।

बिलकुल यही बात राज्य-सरकार या अमेरिका सरकार की नौकरियों में भी लागू होती है। मेरे एक पड़ोसी हैं, जो 40 साल से एक ही पोस्ट ऑफिस में काम कर रहे हैं। उसी पोस्ट ऑफिस में उन्होंने अपनी नौकरी शुरू भी की थी। स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी भी चाहे सरकारी हों या प्राइवेट वहां भी कर्मचारियों-शिक्षकों के तबादले होने के प्रश्न ही नहीं उठते।
बहुत पहले अमेरिकी कर्मचारियों के भी ट्रांसफर होते थे। 1857 में जेम्स बुचानन अमेरिका के 15वें राष्ट्रपति बने। (प्रसंगवश बुचानन एकमात्र आजीवन अविवाहित अमेरिकी राष्ट्रपति हुए हैं।) 1 साल बाद जब उनके ‘सेक्रेटरी ऑफ ट्रेजरार’ (वित्तमंत्री) ने उन्हें बताया कि गत 1 वर्ष में अमेरिकी सरकार ने अपने कर्मचारियों, उनके परिवार और उनके सामान के ट्रांसफर (एक शहर से दूसरे शहर या स्थान पर भिजवाने के लिए) इतने लाख डॉलर खर्च किए तो राष्ट्रपति बुचानन ने इसे फिजूलखर्च बताया और कहा कि जब तक अतिआवश्यक न हो, कर्मचारियों के तबादले न किए जाएं।

बुचानन ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी हमेशा एक ही जगह काम करता रहे तो इसमें बुराई क्या है? बल्कि इसमें सरकार और कर्मचारी दोनों की भलाई ही है। कर्मचारी एक ही शहर या एक ही स्थान में अपना घर बनवा या खरीदकर जिंदगीभर रह सकते हैं।

सरकार अपने कर्मचारियों के ‘ट्रांसफर’ पर जो लाखों-करोड़ों डॉलर खर्च करती है वही खर्च वह बेरोजगारों के लिए उद्योग-धंधे लगाने में खर्च करेगी और इस तरह से बेरोजगारों को काम भी मिलेगा तथा सरकार भी यह व्यर्थ खर्च बचा लेगी। इस तरह राष्ट्रपति बुचानन के आदेश से अमेरिकी सरकार के कर्मचारियों के ट्रांसफर होने बंद हो गए।

राष्ट्रपति ने एक छूट अवश्य दी कि यदि कोई कर्मचारी अपना ट्रांसफर चाहे और उसके लायक कहीं जगह खाली हो तो वह अपने खर्च पर वहां जा सकता है। यानी अपने, अपने परिवार और अपने सारे सामान के ट्रांसफर का सारा खर्च कर्मचारी को स्वयं उठाना पड़ेगा।

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