खुलेंगे ब्रह्मांड की उत्पत्ति के राज-Open secret origin of the universe In Hindi

जिनेवा में बीते दो सालों से चल रहे महाप्रयोग में जुटे वैज्ञानिकों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। वैज्ञानिकों ने दो खास पार्टिकल्स की टक्कर से प्रयोगशाला के भीतर ही एक छोटा सा बिग बैंग बनाने में कामयाबी हासिल की है। ये कामयाबी ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य से पर्दा हटा सकती है। इससे ये पता चल सकता है कि कैसे हुई थी ब्रह्मांड की रचना। दरअसल वैज्ञानिकों का मानना है कि 13.7 खरब साल पहले ब्रह्मांड का अस्तित्व नहीं था। दूर कहीं अंधकार में दो कणों की टक्कर हुई। इस टक्कर से अपार ऊर्जा पैदा हुई। इस प्रक्रिया के बाद बना एक तरह का प्लाज्मा। इस पूरी प्रक्रिया को बिग बैंग थ्योरी कहा जाता है।


जिनेवा में जारी महाप्रयोग में शामिल मशीन लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर दुनिया का सबसे ताकतवर पार्टिकल एक्सलेरेटर है जो कणों को तेज गति से फेंकता रहता है ताकि वो आपस में टकराएं। ये टक्कर बिग बैंग जैसी ही होती है। ये महाप्रयोग बीते सवा दो सालों से चल रहा था। वैज्ञानिक लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर की मदद से प्रोटॉन्स की टक्कर करा रहे थे लेकिन कोई खास कामयाबी नहीं मिल पाई। चार हफ्ते पहले वैज्ञानिकों के दिमाग में एक नया विचारपनपा और उन्होंने प्रोटॉन की जगह कुछ खास आयन्स की टक्कर कराई और टक्कर का नतीजा देख वैज्ञानिक चौंक पड़े।


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इन खास आयनों की टक्कर के लिए एक खास एक्सलेरेटर डिजाइन किया गया जिसका नाम एलिस है। एलिस के अलावा इस प्रयोग में ATLAS और कॉम्पैक्ट म्यूऑन सोलेनॉयड एक्सपेरिमेंट की भी मदद ली गई। प्रयोग के दौरान आयन्स की टक्कर से अविश्वसनीय ऊर्जा से भरे और घने सब एटॉमिक फायरबॉल यानी आग के गोले पैदा हुए इनका तापमान 10 खरब सेल्सियस था जो कि सूरज के केंद्र में मौजूद तापमान से भी लाखों गुना ज्यादा है। टक्कर से निकली ऊर्जा देख वैज्ञानिक खुश हो गए। उनका महाप्रयोग कामयाब रहा।


इस तापमान पर परमाणु के न्यूक्लिस की रचना करने वाले प्रोटॉन और न्यूट्रॉन तक पिघल कर घने क्वार्क और ग्लूऑन की रचना करते हैं जिसे क्वार्क ग्लूऑन प्लाज्मा के नाम से जाना जाता है। क्वॉर्क और ग्लूऑन सब एटॉमिक पार्टिकल हैं। क्वॉर्क ग्लूऑन प्लाज्मा की स्थिति में दोनों एक-दूसरे के आकर्षण से मुक्त रहते हैं। माना जाता है कि बिग बैंग कीरचना के बाद इसी प्लाज्मा का निर्माण हुआ था और फिर ब्रह्मांड की रचना हुई। महाप्रयोग सेजुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि इस प्लाज्मा के गहन अध्ययन से परमाणुओं के न्यूक्लियस को आपस में जोड़े रखने वाली ताकतके बारे में पता चलेगा।

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