अधेड़ उम्र की दिक्‍कते-Mid-life Crisis In Hindi

क्‍या आपकी उम्र 35 से 55 साल के बीच की है? क्‍या आप चारों ओर से चिंताओं से घिरे हुए है? अगर ऐसा है तो यह आपके लिए अच्‍छी खबर नहीं है। उम्र के इस दौर में महिलाओं और पुरूषों दोनों को कई मानसिक परिवर्तनों से गुजरना पड़ता है। ये जीवन का कठिन दौर होता है, इस दौरान आपको कई पारिवरिक जिम्‍मेदारी निभाने के साथ कॅरियर की चिंता भी होती है। दो पार्टनर के बीच यह सबसे असहज समय होता है, इस दौरान लोग सबसे ज्‍यादा भावनात्‍मक होते है। इस उम्र को अधेड़ उम्र कहा जाता है, इस उम्र में लोगों को सबसे ज्‍यादा सर्पोट की जरूरत होती है। इस उम्र के लोग अपने वैवाहिक जीवन से उभरकर अपने दोस्‍तों के साथ कुछ समय बिताना चाहते है और इसीकारण से सबसे ज्‍यादा एक्‍ट्रा – मैरिटल अफेयर भी इसी उम्र के लोगों के होते है। अगर आपका पति या पत्‍नी या फिर कोई दोस्‍त इस उम्र से गुजर रहा है तो उसकी मानसिक स्थिति को समझने का प्रयास करें।


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यहां कुछ लक्षणों के बारे में बताया है जो अधेड़ उम्र की समस्‍याओं से जुड़े है :

1) आह मुझे इन सबमें कोई दिलचस्‍पी नहीं है :

आप यूथ को कुछ भी करने को बोले, उसे हर काम में बहुत मजा आता है लेकिन अगर आप किसी अधेड़ उम्र के इंसान को कुछ करने को कहें तो उसे बोझ लगेगा कि क्‍या यार.. फालतू का काम है। इस उम्र की सबसे बड़ी समस्‍या यही है कि लोगों को कोई रूचि नहीं होती है। इस उम्र में कई बार लोग बोझ महसूस करते है, प्रेशर झेल नहीं पाते है और कुछ लोग तो अपनी नौकरी भी छोड़ देते है। अगर आपका पार्टनर या दोस्‍त ऐसा कर रहा है तो उसे सर्पोट दें ताकि वह उम्र के दौर की इन मुश्किलों से उभर सके।

2) बदले – बदले से लगना :

अचानक से लोग बदलने लगे, उनका पहनावा अटपटा होने लगे और वह पहले से ज्‍यादा यंग दिखने की कोशिश करने लगे। महिलाएं और ज्‍यादा वक्‍त शीशे के सामने बिताने लगे तो समझ जाइए कि अब उन्‍हे कॉम्‍पलेक्‍स फील हो रहा है। इस उम्र के लोग, अपनी यंग एज को बहुत याद करते है और दुबारा से उतने ही एनर्जी से लबरेज बनना चाहते है। ऐसी स्थिति में अपने पार्टनर को सही च्‍वाइस के बारे में सिर्फ सुझाव दें और हर बात में उनकी उम्र के लिहाज के बारे में न बताकर उन्‍हे ग्रेसफुल चीजों के बारे में बताएं जो उन पर फबती हो।

3) डिप्रेशन में रहना :

इस उम्र में लोगों में नीरसपन आ जाता है। उनके पास परिवार की जिम्‍मेदारी होती है, वह दिन रात मशीन के जैसे काम करते है। उन्‍हे अपनी जिन्‍दगी बोझ सी लगती है, ऐसे में इंसान का डिप्रेशन में आना स्‍वाभाविक है। किसी भी रिश्‍ते में दरार सबसे ज्‍यादा इसी उम्र में आती है। दुखी रहना, समस्‍याओं से घिरा रहना, फायदा – नुकसान और नींद का न आना आदि इस उम्र की समस्‍याएं होती है। इस स्थिति में व्‍यक्ति को अपनेपन की सबसे ज्‍यादा जरूरत होती है।

4) एब्‍रप्‍ट इम्‍पल्सिव डिसीजन :

उम्र के इस दौर में लोग तुंरत फैसला ले लेते है जैसे – घर बेचना, तलाक ले लेना, घर छोड़ देना आदि। इस उम्र में सोच बचकानी हो जाती है, उन्‍हे लगने लगता है कि वो ज्‍यादा सोचेगें तो कुछ नहीं कर पाएंगे। लेकिन ऐसे निर्णय लेकर उन्‍हे ही घाटा होता है। बाद में पछतावा होता है लेकिन फिर वो सिर्फ रो सकते है।

5) नरक में रहने जैसा लगना :

इस उम्र में लोगों को अपनी पत्‍नी या पति का साथ भी अच्‍छा नहीं लगता है। उन्‍हे उस इंसान की केयर भी बोझ लगने लगती है, उन्‍हे आजादी पसंद आने लगती है। अगर कोई उनसे ज्‍यादा सवाल जबाव करें तो उन्‍हे खीझ आती है। इस उम्र के लोगों को आप अक्‍सर ये कहते सुनेगें कि मेरी जिन्‍दगी नरक बन गई है। अगर आपके पार्अनर आजकल ऐसा कहने लगे तो समझ जाएं कि उन्‍हे अधेड़ उम्र घेर की दिक्‍कतें घेर चुकी है।

6) सम्‍बंधों में पुरानापन आना :

इस उम्र के लोगों का अपने पार्टनर के साथ सम्‍बंधों में नीरसता आ जाती है, सेक्‍स से लेकर रोजमर्रा की हंसी मजाक भी अब उन्‍हे अच्‍छी नहीं लगती है। कई बार लोग बाहर भी अफेयर चलाते है ताकि वह किसी और से भावनात्‍मक सर्पोट पा सकें। अगर आपके पार्टनर इस एजग्रुप के हैं और देर रात तक फेसबुक या किसी और सोशल साइट पर वक्‍त बिताते है तो आपको उन पर निगरानी रखने की जरूरत है

7) भविष्‍य के बारे में कोई निर्णय न लेना :

उम्र के इस दौर में दिमाग उलझनों से भरा रहता है और लोग भविष्‍य के बारे में सही निर्णय नहीं ले पाते है। कई बार लोग अपनी सेटेल जॉब भी छोड़ देते है, बाद का सोचना भूल जाते है। ऐसे में उनका साथ देना बहुत जरूरी हो जाता है।

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