गरुड़ मुद्रा-Garud Mudra In Hindi

‘गरुड़’ जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है ‘पक्षियों का राजा’ गरुड़ जो भगवान विष्णु का वाहन, सांपों का दुश्मन होता है और तेज दृश्टि वाला होता है।

गरुड़ मुद्रा दोनों हाथों के अंगुठे को आपस में जकड़ लें और दाएं हाथ को बाएं हाथ के ऊपर रखें और हाथों को पेट के निचले हिस्से (स्वाधिष्ठान चक्र) पर रखें और 8-10 बार लम्बे सांस लें और छोड़ें। इसी मुद्रा में हाथों को थोड़ा ऊपर पेट के ऊपर नाभि पर (मणिपुर चक्र) लाएं और 8-10 बार लम्बे सांस लें और छोड़ें। फिर हाथों को थोड़ा ऊपर पेट के ऊपर वाले भाग (अमाश्य यकृत) पर ले आएं और 8-10 बार लम्बे सांस लें और छोड़ें। अंत में हाथों को छाती पर लाएं और 8-10 बार लम्बे सांस लें और छोड़ें। बायां हाथ छाती पर ही रहने दें और दायां हाथ कन्धों पर लाएं और अंगुलियों को खोल कर फैलाएं।

ये क्रिया चार मिनटों में हो जायेगी। इस क्रिया को दिन में तीन बार करें।
उच्च रक्त चाप वाले इस क्रिया को न करें।


GarudMudra

लाभ:

  • मुष्टिजब गरुड़ मुद्रा में हाथों के अलग-अलग स्थान पर सांसों की क्रिया करते हैं तो हाथों के शक्ति केन्द्र तथा सांसों की प्रक्रिया मिल कर सभी अंगों को स्वस्थ बनाती है।
  • मुष्टिशरीर के दाएं एवं बाएं अंग में प्राण शक्ति और उर्जा का संतुलन बनता है।
  • गरुड़ मुद्रा से शरीर के सभी अंग़ों में रक्त संचार बढ़ता है।
  • स्त्रियों में मासिक धर्म से होने वाली पीड़ा समाप्त होती है तथा अनियमिता दूर होती है।
  • पेट के नीचे वाले भाग से लेकर छाती तक सभी अंग क्रियांत्वित होते हैं और पेट के सभी रोग ठीक होते हैं।
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