भारतीय भ्रष्टाचार के बारे में सच्चाई – The truth about Indian corruption in Hindi

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भ्रष्टाचार विश्वव्यापी समस्या तो है ही किन्तु भारत में ये बीमारी कुछ ज्यादा ही गंभीर हो चली है. हाल ही हुए कामनवेल्थ, 2-जी स्पेट्रम जैसे घोटालों ने ये साबित कर दिया है कि राजनीतिज्ञों और भ्रष्टाचार का चोली-दामन का साथ हो चुका है और देश ने यदि जल्द ही कोई उपाय नहीं किए तो फिर भारत को विश्व पटल पर शक्तिशाली और विकसित देश बनाने का सपना, सपना ही रह जाएगा.
कभी अपने वैदिक चिंतन, सदाचार और सम्पूर्ण विश्व का गुरु कहलाने वाले भारत की पहचान आज भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुकी है। शर्म, हया, सद्चरित तो जैसे पिछडेपन की पहचान बन चुका है और भ्रष्टाचार एक उच्च जीवन शैली का पतीक. कैसी विडंबना है।
हमारे यहाँ संविधान के ७३वें और ७४वें संशोधन के माध्यम से शक्तियों का ही विकेंद्रीकरण नहीं किया गया बल्कि बडे ही धूमधाम से भ्रष्टाचार का भी विकेंद्रीकरण किया गया। अगर कोई पश्चिमी देश होता तो भ्रष्टाचार का मामला उजागर होते ही राजनेताओं का राजनैतिक जीवन ही समाप्त हो जाता लेकिन हमारे यहाँ राजनीतिज्ञ अपने राजनैतिक कैरियर की शुरुआत ही भ्रष्टाचार से करते हैं। पहले उल्टे-सीधे किसी भी तरीके से टिकट और वोट खरीदने लायक पैसा जमा किया जाता है, करोडों रुपये देकर टिकिट खरीदा जाता है। ऐसा नहीं है कि इन सबका चुनाव आयोग को पता नहीं होता पर, पर सब चलता है. टिकिट वितरण में आजकल तिलक जैसी स्वराज्य की भावना, मालवीय जैसा राष्ट्र और राष्ट्रभाषा प्रेम, शास्त्रीजी जैसा त्याग आदि नहीं देखे जाते बल्कि देखा जाता है तो सिर्फ धनबल और भुजबल, जो अपनी पार्टी की सीट निकाल सके चाहे किसी भी तरीके से। अब इतना धन देकर टिकेट खरीदा है तो वसूली तो करनी ही है। नतीजतन कभी कफन घोटाला, कभी चारा-भूसा घोटाला, कभी दवा घोटाला, कभी ताबूत घोटाला तो कभी खाद घोटाला। ये सारे भ्रष्टाचार के एक उदाहरण मात्र हैं। हजारों करोड रुपये के २जी स्पेक्ट्रम जैसे घोटालों और भ्रष्टाचार के कॉमन वेल्थ ने दुनिया में भारत की छवि को बहुत नुकसान पहुंचाया है। इंडोएशियन न्यूज सर्विस बर्लिनके अनुसार भ्रष्टाचार के मामले में भारत ने साल भर में काफी तरक्की कर ली है। ट्रांस्पैरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी वर्ष २०१० के भ्रष्टाचार सूचकांक में भारत ८७वें स्थान पर पहुंच गया है। जबकि २००९ में वह ८४वें स्थान पर था। हालांकि पाकिस्तान से हमारे आंकडे काफी सुखद है, यही उपलब्लि क्या कम है?
लगता है जैसे हमारे देश में हर शाख पर उल्लू नहीं एक घोटालेबाज, एक भ्रष्ट आदमी बैठा है. 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में शायद 1,10,000 करोड़ का घोटाला हुआ. ये आंकड़ा लिखते वक्त मुझे ये एहसास भी नहीं हो रहा, कि इतना पैसा वाकई में कितना पैसा होता होगा. कहां रख सकते हैं इसको …और अगर गलती से मिल जाये तो क्या पूरे जीवन में कोई इतनी बड़ी रकम को खर्च कर पायेगा. चलिये रकम की बात बेमायने है, भ्रष्टाचार के स्तर की बात करते हैं.

कुछ वर्षों में जिस तरह से , बडे शस्त्र आयात निर्यात में , आयुध कारागारों में संदेहास्पद अगिनकांडों की शृंखला, पुराने यानों के चालन से उठे सवाल और जाने ऐसी कितनी ही घटनाएं, दुर्घटनाएं और अपराधिक कृत्य सेना ने अपने नाम लिखवाए हैं और अब भी कहीं न कहीं ये सिलसिला ज़ारी है वो इस बात का ईशारा कर रहा है कि अब स्थिति पहले जैसी नहीं है। कहीं कुछ बहुत ही गंभीर चल रहा है। सबसे दुखद और अफ़सोसजनक बात ये है कि अब तक सेना से संबंधित अधिकांश भ्रष्टाचार और अपराध सेना के उच्चाधिकारियों के नाम ही रहा है। आज सेना के अधिकारियों को तमाम सुख सुविधाएं मौजूद होने के बावजूद भी , सेना में भरती , आयुध , वर्दी एवं राशन की सप्लाई तक में बडी घपले और घोटालेबाजी के सबूत , पुरस्कार और प्रोत्साहन के लिए फ़र्जी मुठभेडों की सामने आई घटनाएं आदि यही बता और दर्शा रही हैं कि भारतीय सेना में भी अब वो लोग घुस चुके हैं जिन्होंने वर्दी देश की सुरक्षा के लिए नहीं पहनी है. भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा” – ये कहना है स्विस बैंक के डाइरेक्टर का. स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने यह भी कहा है कि भारत का लगभग 280 लाख करोड़ रुपये उनके स्विस बैंक में जमा है . ये रकम इतनी है कि भारत का आने वाले 30 सालों का बजट बिना टैक्स के बनाया जा सकता है.

भारत के प्रमुख आर्थिक घोटाले

बोफोर्स घोटाला – 64 करोड़ रुपये
यूरिया घोटाला – 133 करोड़ रुपये
चारा घोटाला – 950 करोड़ रुपये
शेयर बाजार घोटाला – 4000 करोड़ रुपये
सत्यम घोटाला – 7000 करोड़ रुपये
स्टैंप पेपर घोटाला – 43 हजार करोड़ रुपयेv
कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला – 70 हजार करोड़ रुपये
2जी स्पेक्ट्रम घोटाला – 1 लाख 67 हजार करोड़ रुपये
अनाज घोटाला – 2 लाख करोड़ रुपए (अनुमानित)
कोयला खदान आवंटन घोटाला – 192 लाख करोड़ रुपये

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