भारतीय राजनीति और भ्रष्टाचार – Indian politics and corruption in Hindi

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जनता में नेताओं और राजनीतिक दलों को लेकर निराशा है। इसकी वजह यह है कि पहले की तरह राजनीति समाजसेवा का माध्यम नहीं रह गई है। अब तो राजनीति धन बटोरने का जरिया बन गई है। नेताओं के कारनामों को देखते हुए लोग किसी भी दल पर भरोसा करने के लिए तैयार नहीं हैं। लोकतंत्र मे लिए यह एक खतरनाक स्थिति है। इसलिए राजनीति में ऎसे नेताओं की जरूरत है जो त्याग, तपस्या और ईमानदारी के उच्च प्रतिमान स्थापित कर सकें। मुश्किल यह है कि आज ईमानदार लोग तो राजनीति में आते ही नहीं हैं। यह प्रवृत्ति बदलनी होगी। जो लोग अपने आपको ईमानदार मानते हैं और व्यवस्था में बदलाव करना चाहते हैं, उन्हें राजनीति में जरूर आना चाहिए। लोकतंत्र में राजनीति के शुद्धिकरण के बिना सुधार की गुंजाइश नजर नहीं आती। इस बात को ध्यान में रखना होगा।
राजनीति एक सम्पूर्ण व्यवस्था कहलाती हैं जिसका मूल उदेश्ये लोकहित होता हैं और जिसकी सफलता जनता की खुशहाली पर निर्भर करती हैं। राजनीति में जनता एक सेवक का चुनाव करती हे ऐसा सेवक जिसे नेता कहा जाता है, जो जनता की हर समस्या से परिचित हो, उसके और जनता के मध्य कोई राज न हो। पारदर्शिता इस व्यवस्था का एक मूल अंग होता हैं। जब शासक अपने सहयोगियों के हर कार्य और राज से परिचित होता हैं तो वो सफल रहता हैं।

लेकिन यह सभी बाते सिर्फ परिभाषित करने मात्र ही है जिसका आज हकीकत से कोई वास्ता नहीं है। आज किसी भी नेता के लिए राजनीति का मतलब
चुनाव जीत कर सत्ता की कुर्सी तक पहुँचाना हैं और फिर 5 सालों तक जितना हो सके जनता के पैसे से अपना हित करना हैं। आज के नेता सेवक नहीं शक्ति में मदहोश अकुशल राजा बन गए हैं, जो अपना कर्तव्य भूल चुके हैं।

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