क्लाउड कंप्यूटिंग – cloud computing

अगर आप सोच रहे हैं कि क्लाउड कंप्यूटिंग बादलों से संबंधित है, तो आप एकदम सही सोच रहे हैं। बस इतना याद रखिए कि इन बादलों में पानी नहीं, बल्कि डिजिटल डाटा- तरह-तरह की जानकारियां तथा उनसे संबंधित अन्य सामग्री भरी होती है। और ये बादल आकाश में नहीं, बल्कि काफी विशालकाय कंप्यूटरों पर- जिन्हें सर्वर कहते हैं -पाए जाते हैं। क्लाउड कंप्यूटिंग की बात आजकल कुछ ज्यादा हो रही है, पर यह कोई नयी चीज नहीं है। अगर आप इंटरनेट पर गए हैं, तो जाने-अनजाने आपने भी इसका इस्तेमाल किया होगा।

ज्यादातर लोग ई-मेल अपने कंप्यूटर पर डाउनलोड नहीं करते, बल्कि इंटरनेट पर देख कर वहीं छोड़ देते हैं. पर आपने कभी यह सोचा कि यह ई-मेल जो आपने इंटरनेट या वेब पर छोड़ रखी है, आखिर कहां सहेज कर रखी जाती है? जवाब सीधा सा है -क्लाउड पर। दरअसल, इस परिकल्पना को साकार बनाया है क्लाउड कंप्यूटिंग कपनी नीवियो ने। इस अभियान में लगे थे दो भारतीय छात्र सचिनदेव दुग्गल और सौरभ प्रदीप धूत। ये दोनों इंपीरियल कॉलेज, लंदन के छात्र होने के अलावा कंप्यूटर तकनीक को विकसित बनाने में जुटे हुए थे।
इनका यह सपना साकार हुआ तो वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम दावोस की तरफ से इन्हें टेक्नोलॉजी पायनियर अवॉर्ड भी मिला था। यह तकनीक आने वाले दिनों में समूची कंप्यूटर तकनीक को बेहद आसान और सस्ता करने वाली है।
क्लाउड आधारित कंप्यूटर सिस्टम पर काम करने वाले को न तो हार्ड ड्राइव की जरूरत रहेगी और न ही मदर बोर्ड के बड़े खर्च की। मात्र की-बोर्ड, माउस, स्क्रीन और मॉडम की मदद से संपूर्ण कंप्यूटर का लुत्फ उठाना संभव होगा। यह निजी कंप्यूटर पर वायरस से होने वाले नुकसान का जोखिम भी दूर करता है। आप कहीं से भी अपने क्लाउड पर स्टोर डाटा को एक्सेस कर सकते हैं।

लाभ

क्लाउड कंप्यूटिंग कंपनियों के प्रौद्योगिकी खर्च में कमी लाता है, क्योंकि इसे संबद्ध ऐप्लीकेशन सदस्यता शुल्क चुका कर ऑनलाइन के जरिये किराए पर लिया जा सकता है। क्लाउड कंप्यूटिंग तकनीक समय की बचत, इन्फ्रास्ट्रक्चर लागत में कमी, डाटा भंडारण में सुगमता, ऐप्लीकेशन प्रबंधन खर्च आदि में अहम भूमिका निभाती है। क्लाउड कम्प्युटिंग के किराये का मॉडल भी बहुत सुविधाजनक है। यहां तक कि इसे एकाध घंटे के लिये किराये पर लिया जा सकता है।

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